Песня Dekh Saare Shaher Pe в исполнении Kavita Krishnamurthy - слушать онлайн в хорошем качестве или скачать трек в Mp3 бесплатно на ПК или телефон.
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Текст песни Kavita Krishnamurthy - Dekh Saare Shaher Pe
रू-रू-रू
रू-रू-रू-रू
रू-रू-रू
रू-रू-रू-रू
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
हुस्न की शोखियाँ बहके जवाँ
रात पे क्यूँ ना हो दिन का घमाँ?
हुस्न की शोखियाँ बहके जवाँ
रात पे क्यूँ ना हो दिन का घमाँ?
दिल में मगर, रोशनी नहीं, है कहाँ?
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
मैं खाली मस्ती में डूबने लगी
पैमारी-बेईमानी टकरा गए
मैं खाली मस्ती में डूबने लगी
पैमारी-बेईमानी टकरा गए
चामी बरा गम की दवा है कहाँ?
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
हंगामी हाल सी हर घड़ी यहाँ
भागती-दौड़ती ज़िंदगी यहाँ
हंगामी हाल सी हर घड़ी यहाँ
भागती-दौड़ती ज़िंदगी यहाँ
रूह को जहाँ, सुकून मिले, चल वहाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल, झिल-मिल तारों को दी मात
गलियों में (गलियों में)
सड़कों पे (सड़कों पे)
लोगों का कारवाँ रवाँ-दवाँ
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात
देख सारे शहर पे छाई हुई रात