Песня ZID в исполнении Sukriti Kakar - слушать онлайн в хорошем качестве или скачать трек в Mp3 бесплатно на ПК или телефон.
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Текст песни Sukriti Kakar - ZID
वास्ता ऐसा तेरा-मेरा
जाने क्या है दिल ये चाहता
ना मैं देखूँ जो तेरा चेहरा
कहीं दिल मेरा ना ठहरा
पहले तो ऐसा कुछ ना था, ओ
मुझे बाँहों में तेरी रहना
मुझे साँसों में तेरी बहना
छाया है मुझपे नशा, ओ
ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
तुझपे मरता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
ना सँभलता है ये दिल, हो
क्यूँ ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ? आ
डोर ये दिल की तोड़ के
ख़याल वफ़ा के छोड़ के
ये दिल मैंने तुझसे लगाया
बोले जिसे तू प्यार वे
मेरी समझ के पार वे
क्यूँ तुझमें खो जाना
है ख़ुद को पाना?
मुझे अब ना जगा रे
लगे ख़्वाबों सा मुझको जहाँ रे
ये वास्ता एक राज़ लगे मुझको
चूमते, झिलमिलाते सवेरे
होंठों पर मिलें तेरे-मेरे
तेरे सिवा ना प्यास लगे मुझको
ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
तुझपे मरता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
ना सँभलता है ये दिल, हो
क्यूँ ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ? आ
फिर से दिल को पूछ ले
सवाल जो तुझको सूझते
बाद में पड़ जाए ना पछताना
प्यार में मुझको पाने का
वास्ता बढ़ाने का
ये पल जो मिला दोबारा
है फिर ना आना
ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
तुझपे मरता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
ना सँभलता है ये दिल, हो
क्यूँ ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ? आ
ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
तुझपे मरता, ਸੋਹਣੀਏ, आ
ना सँभलता है ये दिल, हो
क्यूँ ज़िद करता, ਸੋਹਣੀਏ? आ